शाबर मंत्र प्रयोग

शाबर सुरक्षा कवच

गज गणपति, वीर हनुमान, भैरव नाथ और नरसिंह देव का शाबर कवच इन चार शक्तिशाली देवताओं की शक्ति और सुरक्षा को एक साथ लाता है, जो भक्तों को विभिन्न खतरों और नकारात्मक शक्तियों से बचाता है। शाबर मंत्रों की यह श्रेणी नवनाथों की परंपरा का हिस्सा है। 

इन देवताओं के नाम से जुड़े कवच के लाभ और उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • गज गणपति: बाधाओं का निवारण करने वाले देवता हैं। उनके नाम का कवच या मंत्र कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर करने और सफलता सुनिश्चित करने के लिए होता है।
  • वीर हनुमान: शत्रु, बुरी शक्तियों, भूत-प्रेत और तंत्र बाधाओं के खिलाफ एक शक्तिशाली रक्षक हैं। वीर हनुमान कवच के पाठ से सुरक्षा, शक्ति और समृद्धि मिलती है।
  • भैरव नाथ: ये भगवान शिव का उग्र रूप हैं और तंत्र-बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जा और भय से सुरक्षा प्रदान करते हैं। भैरव नाथ के शाबर मंत्र तंत्र-मंत्र के प्रभावों को निष्क्रिय करने और सुरक्षा के लिए जाने जाते हैं।
  • नरसिंह देव: भगवान विष्णु के उग्र अवतार, जो शत्रुओं के घातक प्रहारों, बुरी नज़र, ग्रह पीड़ा और अन्य गंभीर खतरों से सुरक्षा देते हैं। नरसिंह शाबर कवच का पाठ लंबी यात्राओं के दौरान या किसी गंभीर संकट के समय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। 

शाबर कवच का महत्व:

  • समग्र सुरक्षा: इन चारों देवताओं का एक साथ आह्वान करने वाला कवच साधक को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करता है।
  • बाधा-निवारण: गज गणपति के आशीर्वाद से साधक के सभी काम बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं।
  • शत्रु दमन: वीर हनुमान और नरसिंह देव की शक्ति से शत्रुओं पर विजय मिलती है और उनके बुरे प्रभावों से बचाव होता है।
  • नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: भैरव नाथ के प्रभाव से भूत-प्रेत, ऊपरी बाधाओं और तंत्र-मंत्र से मुक्ति मिलती है। 

मंत्र– ॐ नमो आदेश गुरु को।
अजरी बाँधूँ, बजरी बाँधूँ,
बाँधूँ दसों द्वार।
आन पड़े हनुमान की रक्षा,
राम की कार॥
 पहली चौकी गजगणपति की,
दूजी विकट वीर हनुमान।
तीजी चौकी भूमिया भैरव की,
चौथी नरसिंह की आन॥
 जो इनहीं चौकी को लांघे,
तुरंत ही धूल-भस्म हो जावे।
दुश्मन, बैरी जो कोई करे,
उलट वहीं पे उलटा पड़े॥
 मंत्र सांचा, पिंड कांचा,
फुरो मंत्र गोरख वाचा।
मेरी रक्षा गुरु गोरखनाथ करे,
सत्यनाम, आदेश गुरु को॥

सावधानी:
शाबर मंत्रों का प्रयोग अत्यधिक सावधानी के साथ करना चाहिए। इन्हें श्रद्धा और पवित्रता के साथ जपने की सलाह दी जाती है। साधना के दौरान किसी अनुभवी गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त करना सबसे अच्छा होता है। 

सामग्री – खैर की लकड़ी ,पूजन सामग्री  सिद्ध करने की विधि और मुहूर्त – …………


शाबर आकर्षण मंत्र

शाबर आकर्षण मंत्र, जिसे शाबर वशीकरण मंत्र भी कहा जाता है, शाबर मंत्रों का एक प्रकार है जिसका उपयोग किसी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए किया जाता है। ये मंत्र प्राचीन तंत्र और मंत्रों की शाबर परंपरा का हिस्सा हैं, जो विशेष रूप से गुरु गोरखनाथ और नवनाथों से जुड़ी हुई हैं। 

शाबर मंत्र वैदिक मंत्रों की तुलना में आसान और सीधे होते हैं, और इनका प्रभाव भी बहुत तेजी से होता है। इन्हें आम बोलचाल की भाषा में बनाया गया है, जिससे इनका उच्चारण और जाप करना आसान हो जाता है। 

शाबर आकर्षण मंत्र के लाभ

  • संबंधों में सुधार: प्रेम संबंधों और पारिवारिक संबंधों को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • आकर्षण बढ़ाना: यह मंत्र व्यक्ति के व्यक्तित्व में चुंबकीय आकर्षण पैदा करता है, जिससे वह दूसरों के लिए अधिक आकर्षक बन जाता है।
  • व्यावसायिक सफलता: यह ग्राहकों को आकर्षित करने और व्यावसायिक लाभ को बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।
  • इच्छित व्यक्ति को आकर्षित करना: इसका उपयोग किसी विशेष व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भी किया जा सकता है। 
  • खोए हुए व्यक्ति या कहीं दूर गए हुए व्यक्ति को वापस बुलाना

शाबर आकर्षण मंत्र का प्रयोग

इन मंत्रों का प्रयोग करने से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  1. गुरु का मार्गदर्शन: शाबर मंत्रों का प्रयोग हमेशा किसी अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में करना चाहिए, क्योंकि इनका गलत प्रयोग नुकसानदायक हो सकता है।
  2. सही विधि: मंत्र का सही उच्चारण और विधि का पालन करना आवश्यक है। कई बार विशेष वस्तुओं, जैसे सरसों, मिठाई या इत्र का उपयोग करके मंत्र को सिद्ध किया जाता है।
  3. शुद्धता: साधना के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
  4. अच्छे उद्देश्य: इन मंत्रों का उपयोग कभी भी गलत इरादे से नहीं करना चाहिए। इनका दुरुपयोग साधक के लिए घातक हो सकता है। 

उदाहरण

  • कामदेव शाबर मंत्र: यह मंत्र प्रेम और जुनून की देवी रति से जुड़ा है, और इसका उपयोग प्रेम को आकर्षित करने के लिए किया जाता है।
  • मोहिनी शाबर मंत्र: यह मंत्र मोहिनी देवी को समर्पित है और इसका उपयोग सम्मोहन और आकर्षण के लिए किया जाता है। 

मंत्रॐ नमो आदिपुरुषाय अमुक आकर्षण कुरु कुरु स्वाहा ”

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन मंत्रों का प्रयोग जिम्मेदारी से करना चाहिए और इनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना या किसी के जीवन में जबरदस्ती हस्तक्षेप करना नहीं होना चाहिए।  सामग्री – खैर की लकड़ी ,पूजन सामग्री  सिद्ध करने की विधि और मुहूर्त – …………

शाबर वशीकरण

शाबर वशीकरण मंत्र शाबर परंपरा के ही एक अंग हैं, जिनका उपयोग किसी व्यक्ति या परिस्थिति को अपनी इच्छा के अनुकूल करने के लिए किया जाता है। ये मंत्र गुरु गोरखनाथ और नवनाथों द्वारा विकसित किए गए थे, और इनकी भाषा सरल व देसी होती है, जिस कारण इनका उच्चारण आसान होता है। 

शाबर वशीकरण मंत्र का उद्देश्य

शाबर वशीकरण मंत्रों का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जैसे:

  • प्रेम संबंधों में सुधार: खोए हुए प्यार को वापस पाना या मौजूदा संबंधों में मधुरता लाना।
  • व्यावसायिक सफलता: ग्राहकों को आकर्षित करना या व्यापार को बढ़ावा देना।
  • पारिवारिक विवादों का समाधान: पति-पत्नी के बीच की अनबन या अन्य पारिवारिक झगड़ों को शांत करना।
  • शत्रुओं से सुरक्षा: शत्रुओं को नियंत्रित करना या उनकी नकारात्मक ऊर्जा से बचना। 

प्रयोग में सावधानियाँ

शाबर मंत्रों का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इनके नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं। 

  • नैतिकता: इन मंत्रों का उपयोग हमेशा अच्छे इरादों के साथ करना चाहिए। किसी को नुकसान पहुँचाने या उसकी इच्छा के विरुद्ध कार्य करने के लिए इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • गुरु का मार्गदर्शन: किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही इन मंत्रों का प्रयोग करना चाहिए। गुरु से दीक्षा लेकर मंत्र सिद्ध करना आदर्श माना जाता है।

मंत्रॐ नमो मन मोहिनी रानी,
मोहिना रानी चला सैर को,
सीर पे धरे तेल का दोहनी।
जल मोहूँ, थल मोहूँ,
और मोहूँ सारा संसार॥ मोहिनी रानी पलंग चढ़ बैठी,
मोहर रही दरबार।
मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति दुहाई,
गौरा पार्वती की दुहाई,
बजरंग बली की दुहाई,
नहीं तो लोना चमारिन की आन लगे॥

सामग्री – चमेली का तेल ,पूजन सामग्री  सिद्ध करने की विधि और मुहूर्त – …………

Sabar Vidweshan Mantra

‘शबर विद्वेषण मंत्र’ तांत्रिक साधना का एक हिस्सा है जिसका उद्देश्य दो लोगों के बीच झगड़ा या दुश्मनी पैदा करना होता है। इसे तांत्रिक कर्मों में एक निंदनीय कार्य माना जाता है और इसके इस्तेमाल से जुड़े कई जोखिम हैं। इस तरह के मंत्रों का उपयोग आम तौर पर गुरु की देखरेख में ही किया जाता है और वे केवल कुछ गंभीर परिस्थितियों में ही उपयोग के लिए होते हैं। 

शlबर मंत्र और विद्वेषण

  • शबर मंत्र: ये मंत्र स्थानीय भाषाओं और बोलियों में लिखे गए होते हैं। माना जाता है कि इनकी रचना भगवान शिव ने गुरु गोरखनाथ और 84 सिद्धों के माध्यम से कलियुग में आम लोगों की भलाई के लिए की थी।
  • विद्वेषण मंत्र: ‘विद्वेषण’ का अर्थ है किसी खास तरह का द्वेष या गुप्त दुश्मनी पैदा करना। इसका इस्तेमाल उन लोगों को अलग करने के लिए किया जाता है जो एक-दूसरे के बहुत करीब हैं। 

इस्तेमाल और जोखिम

  • प्रभाव: यह तंत्र का एक शक्तिशाली रूप है जिसका उपयोग किसी के दुश्मन के खिलाफ किया जाता है, जैसे कि दो दोस्तों, पति-पत्नी या परिवार के सदस्यों के बीच लड़ाई-झगड़ा करवाना।
  • दुष्परिणाम: इस प्रकार के मंत्रों का गलत या अनैतिक तरीके से इस्तेमाल करने से व्यक्ति को गंभीर नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञ अक्सर इन मंत्रों के इस्तेमाल से पहले एक गुरु की सलाह लेने की सलाह देते हैं।
  • नैतिक विचार: किसी की स्वतंत्र इच्छा को प्रभावित करना या किसी के जीवन में नकारात्मकता लाना नैतिक रूप से गलत है। तंत्र में, ऐसी क्रियाओं के बुरे कर्म-फल हो सकते हैं। 

मंत्रबारो सरसों तेरा,
राई पाट की माटी,
मसान की छाई।
पढ़कर मारूँ कर तलवार,
अमुक कभी न देखे अमुकी का द्वार॥ मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति।
मंत्र सांचा, पिंड कांचा।
फुरो मंत्र, ईश्वरो वाचा।
सत्य नाम, आदेश गुरु को॥

विशेष सलाह

शबर विद्वेषण मंत्र बहुत जटिल और खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए बिना किसी विशेषज्ञ या गुरु के मार्गदर्शन के इनका इस्तेमाल करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। इन मंत्रों का सावधानी से उपयोग करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनके प्रभाव बहुत शक्तिशाली होते हैं और गलत इरादों के कारण नुकसान भी हो सकता है। 

सामग्री – आक की लकड़ी, धाक की लकड़ी, राई-सरसों, श्मशान की मिट्टी ,पूजन सामग्री  सिद्ध करने की विधि और मुहूर्त – …………

Sabar Uchhatan Mantra

उच्चाटन मंत्र तांत्रिक और आध्यात्मिक साधना का एक हिस्सा है जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को एक स्थान, स्थिति, या किसी अन्य व्यक्ति से मानसिक या भावनात्मक रूप से दूर करना है। विद्वेषण मंत्र की तरह, उच्चाटन भी एक शक्तिशाली क्रिया है, लेकिन इसका उपयोग नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने या हानिकारक प्रभावों को समाप्त करने के लिए भी किया जा सकता है। 

उच्चाटन का अर्थ और उद्देश्य

  • अर्थ: ‘उच्चाटन’ का शाब्दिक अर्थ है ‘स्थान से हटाना’ या ‘उखाड़ फेंकना’। इसका मतलब है किसी को मानसिक या भौतिक रूप से एक जगह से हटाना या किसी व्यक्ति के मन में किसी विशेष स्थान या स्थिति के प्रति अरुचि पैदा करना।
  • उद्देश्य: उच्चाटन का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है:
    • नकारात्मकता को दूर करना: कुछ मंत्रों का उपयोग नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नज़र, या किसी व्यक्ति के जीवन में दुर्भाग्य लाने वाली शक्तियों को दूर करने के लिए किया जाता है।
    • दुश्मन से बचाव: इसका उपयोग शत्रुओं को दूर करने और उनके हानिकारक इरादों को विफल करने के लिए किया जाता है।
    • गलत संगत से मुक्ति: यह किसी व्यक्ति को बुरी संगत या गलत रास्ते से वापस लाने में मदद करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।
    • बाधाओं को समाप्त करना: यह जीवन में आने वाली बाधाओं और रुकावटों को समाप्त करने के लिए किया जाता है। 

मंत्रॐ नमो भगवते रुद्राय,
दुष्टक्रालय, अमुक सुपुत्र बंधवे सह।
हन् हन्, दह दह,
पच पच शीघ्र उच्चाट्य उच्चाट्य
हुम् फट् स्वाहा,
ठः ठः॥

सामग्री – कौवे का पंख, उल्लू की विष्ठा ,पूजन सामग्री  सिद्ध करने की विधि और मुहूर्त – …………

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